उत्तरकाशी-घरेलू गैस की किल्लत,उपभोक्ता परेशान,गैस सिलेंडर न मिलने पर उपभोक्ताओं ने किया सड़क जाम, जिलाधिकारी ने दिए टोकन वितरित करने के निर्देश
उत्तरकाशी।। जनपद में घरेलू गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत के कारण उपभोक्ता लंबी लंबी लाइन लगाकर गैस आने का इंतजार कर रहे है।बीते दो दिन से जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट जिलाधिकारी कार्यालय के पास जहां लोग पिछले 24 घंटे से लाइनों में खड़े है लेकिन जब गैस का ट्रक नहीं आया तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उपभोक्ताओं ने सड़क मार्ग को जाम कर दिया वहीं लोगों के भारी आक्रोश के बाद पुलिस मौके पर पहुंची फिर भी लोगों ने सड़क मार्ग नहीं खोला उपभोक्ताओं का कहना है कि जिला खाद्य आपूर्ति विभाग ने हमें आश्वासन दिया गया था कि कलेक्ट्रेट के पास गैस आएगी लेकिन हम कल रात्रि से लाइनों में खड़े है लेकिन गैस नहीं आई वहीं ऐसी भी बुजुर्ग महिला है जो सड़क में बैठकर कर गैस आने इंतजार कर रही कि गैस आएगी और फिर घर में खाना पकेगा।काफी इंतजार के बाद भी कलेक्ट्रेट के पास गैस नहीं आई और अभी भी उपभोक्ता गैस आने का इतंजार कर रहे है।वहीं लोगों के भारी आक्रोश के बाद जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने खाद्य आपूर्ति विभाग को निर्देशित किया कि लाइनों में जो लोग लगे है उनको टोकन वितरित करें।ताकि गैस आने पर उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर सुविधा अनुसार मिल सके।
जनपद के सभी विकासखंडों के नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इन दिनों घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की किल्लत से जूझ रहे है। घंटों लाइनों में खड़े होने के बाद भी उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है।वहीं होटल , रेस्टोरेंट, ढाबों के भी यही हाल है।कॉमर्शियल गैस न मिलने से होटल मालिकों के व्यवसाय पर सीधा असर पड़ रहा है।19 अप्रैल से चारधाम यात्रा भी शुरू होने वाली है ऐसे में होटल, रेस्टोरेंट एवं ढाबों के मालिकों की चिंता बढ़ गई है। कमर्शियल गैस की किल्लत है आखिर कैसे चलेगा व्यवसाय वहीं जिला प्रशासन ने चारधाम यात्रा में गैस की किल्लत को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाओं जैसे कोयला, लकड़ी, डीजल, पिरूल आदि की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कहा है कि खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत हुई है मुख्यमंत्री ने चार धाम यात्रा में अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं के निर्देश अधिकारियों को दिए है लेकिन बावजूद इसके होटल व्यवसाय व्यवसायियों की चिंता बढ़ गई है।







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