उत्तरकाशी-जिलाधिकारी प्रशांत आर्य एवं सविन बंसल की संवेदनशीलता और तत्परता से मासूम बच्चे को मिला नया जीवनदान
उत्तरकाशी/देहरादून।।जनपद उत्तरकाशी के सुदूरवर्ती गांव के आशीष गढ़वाली एक गरीब परिवार से है।अपने नवजात बच्चे के इलाज के लिए चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल उत्तरकाशी में दौड़ लगाने के बाद जब इलाज नहीं हो पाया तो आशीष अपने बच्चे को लेकर हायर सेंटर देहरादून महंत इंदेश अस्पताल पहुंचा,आशीष को उम्मीद थी कि यहाँ उनके बच्चे का इलाज होगा और जीवनदान' मिलेगा। लेकिन अस्पताल की ओर से इलाज के लिए इलाज से 25 हजार जमा करने को बोला तो आशीष गढ़वाली के पास पैसे नहीं थे।आशीष गढ़वाली ने आयुष्मान कार्ड भी दिखाया लेकिन अस्पताल ने उसको लेने से इनकार कर दिया आशीष के लिए अपने मासूम बच्चे की जिंदगी से बढ़ाकर कुछ नहीं था उसकी छोटी बहन प्रिया ने कुछ धन जुटाया और आशीष ने कुछ गिरवी रखा।उसके बाद पैसे जमा किए।
-:DM प्रशांत आर्य और जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल दिखाया मानवता का धर्म
-: जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और देहरादून के डीएम सविन बंसल को जब मामले का पता चला तो कहते कि मानवता का धर्म सबसे बड़ा होता है।दोनों अधिकारियों ने यह साबित किया कि प्रशासनिक कुर्सी सिर्फ कागजी फाइलों तक ही नहीं बल्कि आम जनता की मदद के लिए भी है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने तत्काल मामले पर कार्यवाही करते हुए मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी उत्तरकाशी को लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाई और स्वयं डीएम ने मामले की मॉनिटरिंग कर शीघ्र जरूरी दस्तावेज (Birth de tails/refer documents) तैयार करवाकर देहरादून भिजवाए।साथ ही डीएम देहरादून से इस मामले में बातचीत की नवजात बच्चे के लिए जिलाधिकारी का इस कदर सक्रिय होना एक मिसाल कायम करता है।वहीं जिलाधिकारी सविन बंसल को भी जब मामले का पता चला तो डीएम बंसल ने अस्पताल प्रबंधन को सख्त लहजे में चेतावनी दी। डीएम ने स्पष्ट किया कि बच्चे का इलाज नहीं रुकना चाहिए। नियम प्रक्रियाएं जान बचाने के लिए हैं, जान लेने के लिए नहीं। डीएम के दखल के बाद ही अस्पताल ने इलाज शुरू किया।
:- उत्तरकाशी जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने समय रहते त्वरित कार्रवाई करते हुए आशीष गढ़वाली के नवजात बच्चे के इलाज के लिए संवेदनशीलता दिखाई जिस कारण नवजात बच्चे को नया जीवनदान मिला है
उत्तरकाशी जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से हारकर जब आशीष गढ़वाली अपने बच्चे के इलाज के लिए देहरादून पहुंचा और महंत इंद्रेश अस्पताल में अपना आयुष्मान कार्ड दिखाया नवजात बच्चे की इलाज के लिए तो अस्पताल प्रशासन ने रेफर पर्ची वर्थ सर्टिफिकेट मांगा जो आशीष पहाड़ी के पास नहीं था जिस कारण अस्पताल प्रशासन ने आशीष पहाड़ी से ₹25000 जमा करने को कहा और उसके बाद ही इलाज होगा यह बताया मानव धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है लेकिन आज स्वास्थ्य और शिक्षा सिर्फ व्यावसायिक हो गए हैं जिस कारण गरीब शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहता है खासकर स्वास्थ्य सेवाओं में धन के अभाव के कारण गरीब तो मौत के मुंह में चले जाते हैं हालांकि राज्य और केंद्र सरकार गरीब के स्वास्थ्य के प्रति काफी सजग है और किसी भी व्यक्ति की मृत्यु पैसों के अभाव में ना हो इसके लिए सरकार ने आयुष्मान जैसी बड़ी योजना चलाई है।फिर भी गरीब की सुध लेने वाला कोई नहीं ....... लेकिन मानवता अभी भी जीवित है ऐसे भी अधिकारी हैं राज्य में जो अपने पद से बड़ा मानवता धर्म समझते हैं जिलाधिकारी प्रशांत आर्य एवं देहरादून के डीएम सविन बंसल.....आशीष गढ़वाली ने दोनों अधिकारियों का धन्यवाद किया है।







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