उत्तरकाशी संकरी मोरी- सिस्टम की अनदेखी का दंश झेल रहे है लोग तालुका मोटर मार्ग हलारा गाड़ के पास बह गया है. लिहाजा, ओसला, गंगाड, पवाणी, ढाटमीर और श्रीगड़ के लोगों को बल्लियों के सहारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है
उत्तरकाशी।।।।आजादी के सात दशक बाद और राज्य गठन के 20 साल बाद भी दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान सरकारों के द्वारा नहीं हो पाया है. जहां बड़े-बड़े मंचों और बैठकों में जनप्रतिनिधियों के द्वारा कहा जाता है कि अंतिम छोर पर बैठे ब्यक्ति तक विकास पहुंच गया है, लेकिन हकीकत ठीक उलट है. इसकी बानगी मोरी तहसील के पांच गांवों में देखने को मिल रही है. जहां ग्रामीण उफनती नदी के ऊपर टूटी हुई बल्लियों के सहारे अपनी जान को जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं. यहां थोड़ी सी चूक और जिंदगी नदी में समा सकती है. इसके बावजूद हैरानी करने वाली बात ये है कि जिला प्रशासन भी आखिर क्यों मौन बैठा रहता है यदि इसमें कोई बड़ा हादसा हो गया तो जिम्मेदार कौन
बताते चलें, उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 220 किमी की दूरी पर स्थित मोरी ब्लॉक के पांच गांव ओसला, गंगाड, पवाणी, ढाटमीर और श्रीगड़ जहां ग्रामीण उफान पर बह रही हलारा गाड़ के ऊपर से टूटी हुई बल्लियों के सहारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गोविंद वन्य जीव विहार के अंतर्गत सांकरी-तालुका मोटर मार्ग हलारा गाड़ के ऊफान में आने से बह गया है. जिससे ग्रामीण बीते 8 से 10 दिनों से जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या की सुध न तो जिला प्रशासन ले रहा और न जनप्रतिनिधि स्थानीय निवासी और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजपाल रावत का कहना है कि अब यह नियति बन कर रह गई है. सरकारें बदलती रही, लेकिन आज भी इन पांच गांव के लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. जबकि, हर साल मानसून में ग्रामीण इसी तरह टूटी हुई बल्लियों के सहारे गांव पहुंचते हैं. बड़ी बात एसडीएम पुरोला को पता ही नहीं कि लोग एस डी एम सोहन सिंह सैनी का कहना है कि अगर ऐसी स्थिति है तो इसे संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित कर इसे दिखवा लेते हैं.



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