उत्तरकाशी-बेलक-जौराई बुग्याल पर्यटन मेले में दिखी लोकसंस्कृति की झलक, पर्यटन विकास से जगी नई उम्मीद,आजादी के बाद पहली बार ग्रामीणों के बीच पहुंचे DM ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत - PiyushTimes.com | Uttarkashi News

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Thursday, August 27, 2026

उत्तरकाशी-बेलक-जौराई बुग्याल पर्यटन मेले में दिखी लोकसंस्कृति की झलक, पर्यटन विकास से जगी नई उम्मीद,आजादी के बाद पहली बार ग्रामीणों के बीच पहुंचे DM ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत

उत्तरकाशी-बेलक-जौराई बुग्याल पर्यटन मेले में दिखी  लोकसंस्कृति की झलक, पर्यटन विकास से जगी नई उम्मीद,आजादी के बाद पहली बार ग्रामीणों  के बीच पहुंचे DM ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत




उत्तरकाशी।।जनपद के विकासखंड भटवाड़ी के सुदूरवर्ती ग्राम स्याबा में जौराई बुग्याल में आयोजित तीन दिवसीय बेलक-जौराई बुग्याल पर्यटन मेले का बुधवार को रंगारंग कार्यक्रम से आगाज हुआ। लोक नृत्य, पारंपरिक पूजा-अर्चना और पांडव संस्कृति की गूंज के बीच मेले का शुभारंभ हुआ।मेले में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ,गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान,जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान,पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ,ब्लॉक प्रमुख ममता पंवार, ब्लॉक प्रमुख राजदीप परमार और भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।




-:आस्था और संस्कृति का संगम है जौराई यात्रा।।



जनपद के जौराई बुग्याल केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र है। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली जौराई यात्रा में दूध, दही और मक्खन से देवी-देवताओं और द्रौपदी माता का अभिषेक किया जाता है। यात्रा के दौरान प्रस्तुत किया जाने वाला पारंपरिक पांडव नृत्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है। यह आयोजन उत्तरकाशी जनपद की प्राचीन लोक परंपराओं को जीवित रखने का सशक्त माध्यम बन रहा है।।




-:जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने दिया होमस्टे और स्वरोजगार का   मंत्र।।



मेले को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि जौराई बुग्याल में अपार पर्यटन संभावनाएं हैं। इसे धरातल पर उतारने के लिए गांव में होमस्टे की मजबूत व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने ग्रामीणों से उन युवाओं की सूची और मोबाइल नंबर प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा जो होमस्टे शुरू करने के इच्छुक हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि युवा बकरी पालन या किसी अन्य स्वरोजगार से जुड़ना चाहते हैं तो अपने प्रस्ताव प्रशासन को दें। हमारा प्रयास है कि गांव की जरूरत के हिसाब से विकास की योजना बने।" डीएम ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का संगम होने से जौराई क्षेत्र को उत्तरकाशी के प्रमुख ग्रामीण पर्यटन डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे स्थानीय युवाओं को गांव में ही रोजगार मिलेगा।



-:आजादी के बाद पहली बार स्याबा गांव पहुंचे  जिलाधिकारी ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत।।




स्याबा गांव के ग्रामीणों के लिए यह दिन ऐतिहासिक बन गया। ग्रामीणों के अनुसार आजादी के बाद यह पहला मौका था जिलाधिकारी ने स्याबा गांव का दौरा किया। डीएम के गांव पहुंचते ही पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से स्वागत करते हुए "जिलाधिकारी प्रशांत आर्य जिंदाबाद" के नारे लगाए। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों तक सड़क सुविधा से वंचित रहने के कारण गांव विकास में पिछड़ गया था, लेकिन अब सड़क पहुंचने से पर्यटन और विकास की नई राह खुली है।



-:स्थानीय ककड़ी भी बनेगी पर्यटन की पहचान।।



जनपद के जौराई क्षेत्र अपने स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए भी जाना जाता है। यहां की ककड़ी अपने स्वाद और आकार के लिए प्रसिद्ध है। ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र की बड़ी मात्रा में ककड़ी  सीजन में बाजार में बेची जाती है। प्रशासन का मानना है कि ऐसे स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़कर ग्रामीणों की आर्थिकी को मजबूत किया जा सकता है। बेलक-जौराई बुग्याल मेला न सिर्फ संस्कृति के संरक्षण का मंच बना, बल्कि सुदूर हिमालयी गांव के लिए विकास की नई उम्मीद भी लेकर आया है।

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