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Saturday, August 30, 2025

उत्तरकाशी-ग्रामीणों ने प्रस्तावित क्रेशर प्लांट लगाने का किया विरोध,जिला प्रशासन के पास दर्ज की आपत्तियां,प्रशासन को उग्र आंदोलन की दी चेतावानी

उत्तरकाशी-ग्रामीणों ने प्रस्तावित क्रेशर प्लांट लगाने का किया विरोध,जिला प्रशासन के पास दर्ज की आपत्तियां,प्रशासन को उग्र आंदोलन की दी चेतावानी 




उत्तरकाशी।।जनपद के भटवाड़ी ब्लॉक के बाड़ागड्डी पट्टी के ग्राम सभा भैलुङा में क्रेशर प्लांट लगना प्रस्तावित है जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को सख्त आपत्तियों का एक प्रार्थना पत्र दिया है जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षर है।ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा भैलुङा वर्तमान समय में जनसंख्या / परिवार विस्तार के साथ एक घनी आबादी वाले गांव के रूप में विकसित हो रहा है।ऐसे स्थिति गांव के पास क्रेशर प्लांट लगना न्यायोचित नहीं है। पूर्व प्रधान उषा गुसांई सहित ग्रामीणों का कहना है कि  प्रशासन की अनुमति अथवा संस्तुति पर भैलुडा के समीप काश्तकारों की भूमि पर बडे पूंजीपतियों  द्वारा स्टोन क्रेशर प्लान्ट लगाने की योजना है। जिसके लिए हम ग्राम सभा भैलुङा के समस्त ग्रामवासी सख्त विरोध करते है।



-:ग्रामीणों के द्वारा क्रेशर प्लांट के विरोध में निम्न आपत्तियां दर्ज की गई।


1-:प्रस्तावित प्लान्ट गांव से लगभग 100-150 मीटर की दूरी पर स्थापित होने पर प्लांट से उड़ने वाली धूल मिट्टी का असर ग्रामीणों पर पड़ने की पूरी सम्भावना है. जिसके फलस्वरूप धूल से होने वाली बीमारी का खतरा ग्रामीणों के जन-जीवन पर हो सकता है, जो मानवीय दृष्टिकोण से अनुचित है।



2-:क्रेशर  प्लान्ट के निकट ही देवदार का सुन्दर जंगल स्थित है  जिससे हम मानवो/पालतू पशुओं आदि को शुद्ध आक्सीजन प्राप्त होता है प्लान्ट स्थापित होने से वर्णित स्थान के सारे पेड़-पौधे नष्ट होने की स्थिति में पहुंच जायेंगे इससे पर्यावरण का खतरा बढने की पूरी सम्भावना है। जिससे इस स्थान की नैसर्गिक सुन्दरता भी प्रभावित होगी, जो मानवीय एवं भोगोलिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है।



3-:यह भी ज्ञातव्य हो कि वर्णित प्लान्ट के लगभग 25 से 30 मीटर की दूरी पर हम सनातन धर्मावलाम्बियों की आस्था का एक प्राचीन शिव मन्दिर (तोनेश्वर महादेव) स्थित है। जिसका वर्ष 2024 में जीर्णोद्वार ग्रामीणों द्वारा कराया गया है वह भी घुल-घर्षित, हो कर खराब हो जोयगा तथा संत महात्माओं एवं धर्मावलामियों द्वारा आश्रम में भण्डारा करवाया जाता है जो धूल-धूसरित हो कर खराब हो जायेगा जो असहनीय होगा।



4-:प्लान्ट लगने से बडे बडे भारी वाहनों का आवागमन बहुतायत मात्रा में होगा जिसके कारण सडक खराब तो होगी ही इसके अतिरिक्त ध्वनि प्रदूषण का खतरा बढ़ जायेगा जो हमारे शान्त जीवन को प्रभावित करेगा।


5-:प्रस्तावित प्लांट की वजह से भूकम्पन होगा जिससे आसपास की जमीन एवं जंगल कमजोर पड जायेगी, जबकि  सभी को ज्ञात है  कि सन् 1991 के विनाशकारी भूकम्प से भैलूडा गांव में काफी जनहानियां हुई थी। भूकम्प की दृष्टि से गांव अति संवेदनशील है। यह भी एक सोचनीय बिन्दु है।


6-:प्रस्तावित प्लान्ट इन्द्रावती नदी के लगभग 02 से 05 मीटर की दूरी पर लगने से भूकम्पन होगा जिससे आस-पास की जमीन कमजोर पड़ने के कारण नदी के बहाव में परिवर्तन आयेगा और ग्राम भैलुडा जो इन्द्रावती नदी के किनारे बसा है। जबकि 1998 से भैलुडा गांव में इन्द्रावती नदी में बाढ आने के कारण लोगो को रात भर जागना पडता है और दूर छानियों में जाना पडता है। बाढ आने का खतरा बढ़ जायेगा जिससे जान-माल का नुकशान हो सकता। प्लांट वाली प्रस्तावित जमीन (खेती) सन् 1998 की बाढ़ में दरिया बुझ हो रखी है। ग्रामवासियों द्वारा शासन-प्रशासन से बार-बार विस्तापन की भी मांग की गई है। यह भी एक विचारणीय बिन्दु है।




ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि  ग्राम सभा भैलुड़ा के निकट लगने वाले स्टोन क्रेशर प्लान्ट को  यहां से तत्काल निरस्त  करें,अन्यथा ग्रामीणों को एक बृहद आन्दोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसके लिए शासन प्रशासन उत्तरदायी होगा।

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